भवाय चन्द्रचूडाय निर्गुणाय गुणात्मने ।
जन्माष्टमी का त्योहार दो दिन मनाने के पीछे देश के दो संप्रदाय हैं जिनमें पहला नाम स्मार्त संप्रदाय जबकि दूसरा नाम वैष्णव संप्रदाय का है।
सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्रम् देवी दुर्गा का एक अत्यंत शक्तिशाली और गुप्त मंत्र स्तोत्र माना जाता है, जिसे दुर्गा सप्तशती का सार भी कहा जाता है। इस स्तोत्र के पाठ से सम्पूर्ण चंडी पाठ का फल प्राप्त होता है। भक्त विशेष रूप से नवरात्रि, दुर्गा पूजा, अष्टमी-नवमी और शक्ति साधना के समय इसका जप करते हैं। सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्र का नियमित पाठ करने से नकारात्मक शक्तियों का नाश, सुरक्षा कवच की प्राप्ति और मां दुर्गा की विशेष कृपा मिलती है।
श्री सत्यनारायण जी की आरती भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की स्तुति में गाई जाने वाली पवित्र और श्रद्धामयी आरती है। हिंदू धर्म में सत्यनारायण भगवान को सत्य, धर्म और कल्याण के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। भक्त विशेष रूप से सत्यनारायण व्रत कथा, पूर्णिमा पूजा, गृह पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के समय इस आरती का पाठ करते हैं। श्रद्धा और भक्ति से सत्यनारायण जी की आरती करने से जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।