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जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
एक दन्त दयावन्त, चार भुजाधारी,
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी।।
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़ें मेवा,
लडुअन के भोग लगा संत करें सेवा।।
जय गणेश जय गणेश….
अन्धन को आँख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।।
हार चढ़ें फूल चढ़ें और चढ़ें मेवा,
लडुअन को भोग लगे संत करें सेवा।।
जय गणेश जय गणेश…..
दीनन की लाज रखो, शंभू सुतकारी,
कामना को पूर्ण करो, जाऊँ बलिहारी।।
सूर श्याम शरण आये, सफल कीजे सेवा,
लडुअन को भोग लगे संत करें सेवा।।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेव।।
गणेश जी की आरती किसी भी दिन की जा सकती है, लेकिन इन दिनों में करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है:
1. बुधवार: बुधवार का दिन गणेश जी को समर्पित है, इसलिए इस दिन आरती करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
2. गणेश चतुर्थी: गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी की आरती करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
3. पूर्णिमा: पूर्णिमा के दिन गणेश जी की आरती करना शुभ माना जाता है।
4. अमावस्या: अमावस्या के दिन गणेश जी की आरती करना भी शुभ माना जाता है।
इसके अलावा, आप गणेश जी की आरती किसी भी शुभ मुहूर्त में कर सकते हैं, जैसे कि:
- प्रातःकाल: सूर्योदय से पहले गणेश जी की आरती करना शुभ माना जाता है।
- मध्याह्न: दोपहर में भी 12 बजे तक आप गणेश जी की आरती कर सकते हैं।
- संध्याकाल: सूर्यास्त के समय गणेश जी की आरती करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
आरती करने से पहले स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। आरती के दौरान गणेश जी की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें और दीपक जलाएं। आरती के बाद, प्रसाद वितरित करें।