माँ दुर्गाकी नव शक्तियोंका दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणीका है। यहाँ श्ब्राश् शब्दका अर्थ तपस्या है। ब्रह्मचारिणी अर्थात् तपकी चारिणी-तपका आचरण करनेवाली। कहा भी है वेदस्तत्वं तपो ब्रह्म-वेद, तत्त्व और तप श्ब्राश् शब्दक अर्थ हैं।
स्कंद षष्ठी भग वान कार्तिकेय (मुरुगन) को समर्पित एक पवित्र व्रत है, जिसे हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में भी भक्त इस दिन उपवास, पूजा और मंत्र जप करके भगवान स्कंद से साहस, विजय और जीवन की बाधाओं को दूर करने का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। विशेष रूप से नवंबर 2026 की स्कंद षष्ठी को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह भगवान मुरुगन की असुर सुरपद्म पर विजय की स्मृति में मनाई जाती है।
जगदीश जी की आरती भगवान विष्णु के पवित्र स्वरूप की स्तुति में गाई जाने वाली अत्यंत प्रसिद्ध और भक्तिमय आरती है। “ॐ जय जगदीश हरे” आरती को हिंदू धर्म में घरों और मंदिरों में दैनिक पूजा के अंत में गाया जाता है। भगवान जगदीश को सृष्टि के पालनकर्ता और भक्तों के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। श्रद्धा से इस आरती का गान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
श्री कुबेर जी की आरती धन के देवता भगवान कुबेर को समर्पित एक पवित्र भक्ति आरती है। हिंदू धर्म में कुबेर जी को धन, संपत्ति और समृद्धि के अधिपति माना जाता है। विशेष रूप से धनतेरस, दीपावली और कुबेर पूजा के अवसर पर भक्त इस आरती का पाठ करते हैं। कुबेर जी की आरती करने से धन-समृद्धि, आर्थिक उन्नति और जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है।