छठी मईया प्रसिद्ध भजन | Chhath Maiya Prasiddh Geet

छठी मईया प्रसिद्ध गीत


ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥

अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥

ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥


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श्री बद्रीनाथजी जी की आरती | बद्रीनाथ धाम आरती (नारायण भक्ति स्तुति)

श्री बद्रीनाथजी जी की आरती भगवान विष्णु के बद्रीनाथ स्वरूप की स्तुति में गाई जाने वाली पवित्र और दिव्य आरती है। उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में स्थित बद्रीनाथ धाम चार धामों में से एक प्रमुख तीर्थ माना जाता है, जहां भगवान बद्रीनारायण की पूजा की जाती है। भक्त विशेष रूप से बद्रीनाथ मंदिर आरती, चारधाम यात्रा, वैष्णव पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के समय इस आरती का श्रद्धा से गान करते हैं। बद्रीनाथ जी की आरती करने से भगवान विष्णु की कृपा, आध्यात्मिक शांति और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

प्रदोष व्रत की कथा (Pradosh Vrat Ki Katha )

प्राचीनकाल में एक गरीब पुजारी हुआ करता था। उस पुजारी की मृत्यु के बाद उसकी विधवा पत्नी अपने भरण-पोषण के लिए पुत्र को साथ लेकर भीख मांगती हुई शाम तक घर वापस आती थी।

श्री विन्धेश्वरी चालीसा (Shri Vindheshwari Chalisa)

नमो नमो विन्ध्येश्वरी, नमो नमो जगदम्ब ।
सन्तजनों के काज में, करती नहीं विलम्ब ॥

क्यों मनाते हैं कजलियां पर्व (Kyon Manaate Hain Kajaliyaan Parv)

रक्षाबंधन के एक दिन बाद क्यों मनाते हैं कजलियां पर्व, जानिए क्या है इनका इतिहास

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