श्री यमुना माता जी की आरती | Yamuna Mata Aarti

ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता।

जो नहावे फल पावे, सुख सम्पत्ति की दाता॥

ॐ जय यमुना माता...


पावन श्रीयमुना जल, शीतल अगम बहै धारा।

जो जन शरण में आया, कर दिया निस्तारा॥

ॐ जय यमुना माता...


जो जन प्रातः ही उठकर, नित्य स्नान करे।

यम के त्रास न पावे, जो नित्य ध्यान करे॥

ॐ जय यमुना माता...


कलिकाल में महिमा, तुम्हारी अटल रही।

तुम्हारा बड़ा माहात्म्य, चारों वेद कही॥

ॐ जय यमुना माता...


आन तुम्हारे माता, प्रभु अवतार लियो।

नित्य निर्मल जल पीकर, कंस को मार दियो॥

ॐ जय यमुना माता...


नमो मात भय हरणी, शुभ मंगल करणी।

मन बेचैन भया है, तुम बिन वैतरणी॥

ॐ जय यमुना माता...


ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता।

जो नहावे फल पावे, सुख सम्पत्ति की दाता॥

ॐ जय यमुना माता...


बोलिये यमुना माता की जय

........................................................................................................
महाशिवरात्रि व्रत कथा प्रारम्भ (Mahashivratri Vrat Katha Prarambh)

भगवान शिव की महिमा सुनकर एक बार ऋषियों ने सूत जी से कहा- हे सूत जी आपकी अमृतमयी वाणी और आशुतोष भगवान शिव की महिमा सुनकर तो हम परम आनन्दित हुए।

ब्रह्मा चालीसा (Brahma Chalisa)

जय जय कमलासान जगमूला, रहहू सदा जनपै अनुकूला ।

जय गणेश देवा आरती | Shri Ganesh Ji Ki Aarti (विघ्नहर्ता गणपति स्तुति)

गणेश जी की आरती भगवान गणपति की स्तुति में गाई जाने वाली सबसे लोकप्रिय और मंगलकारी आरतियों में से एक है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि के दाता और सभी शुभ कार्यों के आरंभ में पूजे जाने वाले देवता माना जाता है। भक्त विशेष रूप से गणेश चतुर्थी, बुधवार पूजा, गणपति उत्सव और दैनिक मंदिर आरती के समय इस आरती का गान करते हैं। श्रद्धा से गणेश जी की आरती करने से जीवन के विघ्न दूर होते हैं और बुद्धि, सफलता तथा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र मंत्र | Shiv Panchakshar Stotram (ॐ नमः शिवाय स्तुति)

शिव पंचाक्षर स्तोत्र मंत्र भगवान शिव की महिमा का गुणगान करने वाला अत्यंत पवित्र स्तोत्र है, जो “ॐ नमः शिवाय” पंचाक्षरी मंत्र पर आधारित है। इस स्तोत्र में महादेव के दिव्य स्वरूप और उनकी अनंत शक्तियों का सुंदर वर्णन मिलता है। भक्त विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास, सोमवार व्रत, रुद्राभिषेक और शिव पूजा के समय इस स्तोत्र का पाठ करते हैं। शिव पंचाक्षर स्तोत्र का नियमित जप करने से मन को शांति, पापों से मुक्ति और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।