अहोई माता जी की आरती | Ahoi Mata Aarti (व्रत विशेष भक्ति गीत)

जय अहोई माता, मैया जय अहोई माता।

तुमको निसदिन ध्यावत, हर विष्णु विधाता॥

जय अहोई माता...


ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमला, तू ही है जगमाता।

सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

जय अहोई माता...


माता रूप निरंजन, सुख-सम्पत्ति दाता।

जो कोई तुमको ध्यावत, नित मंगल पाता॥

जय अहोई माता...


तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता।

कर्म-प्रभाव प्रकाशक, भवनिधि की त्राता॥

जय अहोई माता...


जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।

सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता॥

जय अहोई माता...


तुम बिन सुख न होवे, पुत्र न कोई पाता।

खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥

जय अहोई माता...


शुभ गुण मंदिर सुन्दर, क्षीरोदधि जाता।

रत्न-चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥

जय अहोई माता...


श्री अहोई माँ की आरती, जो कोई नर गाता।

उर उमंग अति उपजे, पाप उतर जाता॥

जय अहोई माता...


जय अहोई माता, मैया जय अहोई माता।

तुमको निसदिन ध्यावत, हर विष्णु विधाता॥

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Skanda Sashti 2026: स्कंद षष्ठी व्रत, कथा और इसका पौराणिक महत्व

स्कंद षष्ठी भग वान कार्तिकेय (मुरुगन) को समर्पित एक पवित्र व्रत है, जिसे हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में भी भक्त इस दिन उपवास, पूजा और मंत्र जप करके भगवान स्कंद से साहस, विजय और जीवन की बाधाओं को दूर करने का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। विशेष रूप से नवंबर 2026 की स्कंद षष्ठी को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह भगवान मुरुगन की असुर सुरपद्म पर विजय की स्मृति में मनाई जाती है।

खाटुश्याम चालीसा (Khatushyam Chalisa )

श्री गुरु चरणन ध्यान धर, सुमीर सच्चिदानंद ।

श्री धन्वन्तरि जी की आरती | Shri Dhanvantari Ji Ki Aarti

श्री धन्वन्तरि जी की आरती भगवान धन्वन्तरि को समर्पित एक पवित्र भक्ति आरती है। हिंदू धर्म में भगवान धन्वन्तरि को आयुर्वेद और स्वास्थ्य के देवता माना जाता है। वे समुद्र मंथन के समय अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। विशेष रूप से धनतेरस, धन्वन्तरि जयंती और आयुर्वेद दिवस के अवसर पर भक्त इस आरती का पाठ करते हैं। धन्वन्तरि जी की आरती करने से स्वास्थ्य, दीर्घायु और रोगों से मुक्ति की कामना की जाती है।

कन्हैया ने जब पहली बार बजाई मुरली, सारी सृष्टि में आनंद की लहर दौड़ी

मुरलीधर, मुरली बजैया, बंसीधर, बंसी बजैया, बंसीवाला भगवान श्रीकृष्ण को इन नामों से भी जाना जाता है। इन नामों के होने की वजह है कि भगवान को बंसी यानी मुरली बहुत प्रिय है। श्रीकृष्ण मुरली बजाते भी उतना ही शानदार हैं।