ऋषि पंचमी व्रत 2026: रजस्वला दोष से मुक्ति पाने के लिए महिलाएं ऐसे रखें व्रत, जानें नियम और महत्व

ऋषि पंचमी व्रत 2026 का महत्व

हिंदू धर्म में व्रत रखना एक महत्वपूर्ण परंपरा है। ये हमें अपने जीवन को सुधारने और आध्यात्म से जुड़ने के लिए प्रेरित करती है साथ ही हमारे शरीर का संतुलन भी बना रहता है। ऋषि पंचमी का व्रत भी एक ऐसा ही व्रत है, जो हमें ज्ञान और पवित्रता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। इस व्रत के माध्यम से, हम सात ऋषियों को याद करते हैं जिन्होंने मानवता को ज्ञान और पवित्रता का मार्ग दिखाया। विशेष रूप से इस व्रत का महत्व महिलाओं के लिए ज्यादा अधिक है, जो अपने मासिक धर्म के दौरान होने वाली अशुद्धता को दूर करने के लिए इस व्रत को धारण करती हैं। इस व्रत के माध्यम से वे अपने शरीर और मन को पवित्र बनाने के लिए प्रार्थना करती हैं और सात ऋषियों से आशीर्वाद लेती हैं। भक्तवत्सल के इस आर्टिकल में हम ऋषि पंचमी व्रत के महत्व, इसके लाभ, व्रत रखने की विधि और व्रत की कथा के बारे में विस्तार से जानेंगे।

हिंदू धर्म में ऋषि पंचमी का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से महिलाएं रखती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सप्तऋषियों की पूजा करने से महिलाओं को अनजाने में हुए रजस्वला दोष से मुक्ति मिलती है।

शास्त्रों में कहा गया है कि मासिक धर्म के दौरान अज्ञानवश हुई धार्मिक त्रुटियों के प्रायश्चित के लिए यह व्रत किया जाता है। इस दिन व्रत रखने से शरीर और मन दोनों की शुद्धि होती है तथा परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।


ऋषि पंचमी व्रत 2026 तिथि

वर्ष 2026 में ऋषि पंचमी का व्रत 16 सितंबर 2026, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं सुबह स्नान करके सप्तऋषियों का पूजन करती हैं और दिनभर व्रत रखती हैं। 

ऋषि पंचमी व्रत की विधि 


1. स्नान: व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। (कुछ स्थानों पर इस व्रत में स्नान के समय बोलना निषेध बताया गया है)

2. पूजा: स्नान के बाद सात ऋषियों की पूजा करें और उन्हें फूल, फल और अनाज चढ़ाएं।

3. सप्त ऋषियों की पूजा में हल्दी, चंदन, रोली, अबीर, गुलाल, मेहंदी, अक्षत, वस्त्र, फूल आदि का उपयोग किया जाता है। 

4. व्रत का संकल्प: पूजा के बाद व्रत का संकल्प लें और सात ऋषियों से आशीर्वाद मांगें।

5. व्रत: व्रत के दिन केवल एक बार भोजन करें और वह भी सात्विक और शुद्ध भोजन होना चाहिए।

6. कथा सुनना: व्रत के दिन सात ऋषियों की कथा सुनने का भी विधान है।

7. आरती: संध्या के समय सात ऋषियों की आरती करना चाहिए।

8. व्रत का पारायण: अगले दिन सुबह स्नान के बाद व्रत का पारायण करना चाहिए।


ऋषि पंचमी पर खाया जाता है साठी का चावल

ऋषि पंचमी में साठी (मोरधन) का चावल और दही खाए जाने की परंपरा है। हल से जुते अन्न और नमक इस व्रत में खाना मना है। पूजन के बाद कलश सामग्री को दान करें। ब्राह्मण भोजन के बाद ही स्वयं भोजन करें।


इन बातों का रखें ध्यान

  1. सुबह से दोपहर तक उपवास करें। पूजा स्थान को गोबर से लीपें।
  2. लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन से दूर रहें।
  3. पूजा करते समय मन को शांत रखें और पूरे श्रद्धा भाव से सप्तऋषियों का स्मरण करें।
  4. व्रत कथा सुनना या पढ़ना आवश्यक माना जाता है।
  5. मिट्टी या तांबे के कलश में जौं भर कर चौक पर स्थापित करें।
  6. पंचरत्न, फूल, गंध, अक्षत से पूजन कर व्रत का संकल्प करें।
  7. कलश के पास अष्टदल कमल बनाकर, उसके दलों में ऋषियों और उनकी पत्नी की प्रतिष्ठा करें।
  8. सभी सप्तऋषियों का 16 वस्तुओं से पूजन करें।


व्रत रखने के लाभ

ऋषि पंचमी का व्रत रखने से महिलाओं को कई आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं।

  • रजस्वला दोष से मुक्ति मिलती है।
  • जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
  • परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
  • पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

निष्कर्ष

ऋषि पंचमी का व्रत महिलाओं के लिए आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। सही नियमों और श्रद्धा के साथ यह व्रत रखने से न केवल धार्मिक लाभ मिलते हैं बल्कि मन और जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन आता है।

ऋषि पंचमी व्रत कथा 

पूजा करने के बाद ऋषि पंचमी व्रत की कथा सुनी जाती है। इस कथा को सुनने का बहुत महत्व होता है। भक्तवत्सल की वेबसाइट पर कथा सेक्शन में जाकर आप ऋषिपंचमी व्रत कथा पढ़ सकते हैं। 


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